वर्तमान में सौर ऊर्जा उपकरणों के निर्माण के क्षेत्र में लगभग पूरी दुनिया में चीन की बादशाहत कायम है। भारत ही नहीं दुनिया के दूसरे देश में सौर ऊर्जा के ज्यादातर उपकरणों के लिये चीन पर निर्भर है। हालांकि भारत के साथ साथ कई दूसरे देशों में भी सोलर पैनल बनाने में उपयोग होने वाले सिलिकाॅन सैल आदि का निर्माण होता है, परन्तु चीनी उत्पाद बेहद सस्ते होने के चलते बाजार में इन्हीं की मांग अधिक है। 


भारत सरकार की ओर से चीन से सौर ऊर्जा कंपोनेंट के आयात को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से 1 अप्रैल 2022 से सोलर माॅड्यूल्स पर 40 प्रतिशत और सोलर सेल के आयात पर 25 प्रतिशत की दर से इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं दूसरी ओर घरेलू स्तर पर ही सौर ऊर्जा उपकरणों के निर्माण को सरकारी स्तर पर भी प्रोत्साहित करने की योजना बनाई गई है। 

सरकार के सोलर मेन्युफेक्चरिंग अभियान में देशी विदेशी कई कंपनियों ने अपनी रुचि दिखाई है। अमेरिका की सिलिकाॅन वेफर, फस्र्ट सोलर भारत की विक्रम सोलर, अडानी सोलर, रिलांयस, एस्मे सोलर, रिन्यू पावर जैसी कंपनियों की ओर से देश में 22 हजार करोड़ से भी अधिक के निवेश प्रस्ताव दिये हैं। सरकार द्वारा सोलर पावर सेक्टर में निवेश करने वाली कंपनियों को 1.97 लाख करोड़ के विभिन्न लाभ दिये जायेंगे। जाहिर सी बात है इतने बड़े स्तर पर निवेश आने और संयत्र लगने से देश में रोजगार के अवसरों में भी भारी वृद्धि होगी और देश सोलर उपकरणों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ सकेगा।